ग्रंथश्रीरामचरितमानसबालकाण्डदोहा 171171.2श्रीरामचरितमानस 171.2रिपु तेजसी अकेल अपि लघु करि गनिअ न ताहु। अजहुँ देत दुख रबि ससिहि सिर अवसेषित राहु ॥170॥पिछलापूरा अध्याय