ग्रंथश्रीरामचरितमानसबालकाण्डदोहा 165165.2श्रीरामचरितमानस 165.2जरा मरन दुख रहित तनु समर जितै जनि कोउ। एकछत्र रिपुहीन महि राज कलप सत होउ ॥164॥पिछलापूरा अध्याय