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श्रीरामचरितमानस 155.2

स्वबस बिस्व करि बाहुबल निज पुर कीन्ह प्रबेसु।
अरथ धरम कामादि सुख सेवइ समयँ नरेसु ॥154॥

पूरा अध्याय