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श्रीरामचरितमानस 15.3

सो न होइ बिनु बिमल मति मोहि मति बल अति थोर।
करहु कृपा हरि जस कहउँ पुनि पुनि करउँ निहोर ॥14(ख)॥

पूरा अध्याय