ग्रंथश्रीरामचरितमानसबालकाण्डदोहा 146146.2श्रीरामचरितमानस 146.2श्रवन सुधा सम बचन सुनि पुलक प्रफुल्लित गात। बोले मनु करि दंडवत प्रेम न हृदयँ समात ॥145॥पिछलापूरा अध्याय