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श्रीरामचरितमानस 136.2

होहु निसाचर जाइ तुम्ह कपटी पापी दोउ।
हँसेहु हमहि सो लेहु फल बहुरि हँसेहु मुनि कोउ ॥135॥

पूरा अध्याय