ग्रंथश्रीरामचरितमानसबालकाण्डदोहा 133133.2श्रीरामचरितमानस 133.2जेहि बिधि होइहि परम हित नारद सुनहु तुम्हार। सोइ हम करब न आन कछु बचन न मृषा हमार ॥132॥पिछलापूरा अध्याय