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श्रीरामचरितमानस 130.2

बिरचेउ मग महुँ नगर तेहिं सत जोजन बिस्तार।
श्रीनिवासपुर तें अधिक रचना बिबिध प्रकार ॥129॥

पूरा अध्याय