ग्रंथश्रीरामचरितमानसबालकाण्डदोहा 112112.2श्रीरामचरितमानस 112.2मगन ध्यानरस दंड जुग पुनि मन बाहेर कीन्ह। रघुपति चरित महेस तब हरषित बरनै लीन्ह ॥111॥पिछलापूरा अध्याय