Utshovऐप डाउनलोड करें

श्रीरामचरितमानस 111.2

बहुरि कहहु करुनायतन कीन्ह जो अचरज राम।
प्रजा सहित रघुबंसमनि किमि गवने निज धाम ॥110॥

पूरा अध्याय