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श्रीरामचरितमानस 110.2

बंदउ पद धरि धरनि सिरु बिनय करउँ कर जोरि।
बरनहु रघुबर बिसद जसु श्रुति सिद्धांत निचोरि ॥109॥

पूरा अध्याय