ग्रंथश्रीरामचरितमानसबालकाण्डदोहा 109109.2श्रीरामचरितमानस 109.2जौं नृप तनय त ब्रह्म किमि नारि बिरहँ मति भोरि। देख चरित महिमा सुनत भ्रमति बुद्धि अति मोरि ॥108॥पिछलापूरा अध्याय