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श्रीरामचरितमानस 10.2

भनिति मोरि सब गुन रहित बिस्व बिदित गुन एक।
सो बिचारि सुनिहहिं सुमति जिन्ह कें बिमल बिवेक ॥9॥

पूरा अध्याय