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महाभारत 62.7

वैशंपायन उवाच
त्वद्युक्तोऽयमनुप्रश्नो यन्मां पृच्छसि पार्थिव
तत्तेऽहं संप्रवक्ष्यामि यथावद्भरतर्षभ

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