Utshovऐप डाउनलोड करें

महाभारत 60.43

सभायां याज्ञसेनी च कृष्टा द्यूते रजस्वला
तदैव तावद्दुष्टात्मन्वध्यस्त्वं निरपत्रपः

पूरा अध्याय