ग्रंथमहाभारतशल्यपर्वअध्याय 5757.25महाभारत 57.25समं प्रहरतोस्तत्र शूरयोर्बलिनोर्मृधे क्षुब्धयोर्वायुना राजन्द्वयोरिव समुद्रयोःपिछलाअगलापूरा अध्याय