ग्रंथमहाभारतशल्यपर्वअध्याय 5454.33महाभारत 54.33व्याघ्राविव सुसंरब्धौ गर्जन्ताविव तोयदौ जहृषाते महाबाहू सिंहौ केसरिणाविवपिछलाअगलापूरा अध्याय