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महाभारत 53.35

सरस्वती सर्वनदीषु पुण्या; सरस्वती लोकसुखावहा सदा
सरस्वतीं प्राप्य जनाः सुदुष्कृताः; सदा न शोचन्ति परत्र चेह च

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