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महाभारत 37.38

भो भो ब्राह्मण धर्मज्ञ किमर्थं नरिनर्त्सि वै
हर्षस्थानं किमर्थं वै तवेदं मुनिसत्तम
तपस्विनो धर्मपथे स्थितस्य द्विजसत्तम

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