Utshovऐप डाउनलोड करें

महाभारत 25.18

विक्षिपन्सुमहच्चापं कार्तस्वरविभूषितम्
विसृजन्सायकांश्चैव विषाग्निप्रतिमान्बहून्

पूरा अध्याय