ग्रंथमहाभारतशल्यपर्वअध्याय 2121.38महाभारत 21.38ते समासाद्य समरे परस्परमरिंदमाः विव्यधुश्चैव जघ्नुश्च समासाद्य महाहवेपिछलाअगलापूरा अध्याय