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महाभारत 21.36

नराश्चैव नरैः सार्धं दन्तिनो दन्तिभिस्तथा
हया हयैः समासक्ता रथिनो रथिभिस्तथा
संकुलं चाभवद्भूयो घोररूपं विशां पते

पूरा अध्याय