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महाभारत 19.11

ततस्तु तं वै द्विरदं महात्मा; प्रत्युद्ययौ त्वरमाणो जयाय
जम्भो यथा शक्रसमागमे वै; नागेन्द्रमैरावणमिन्द्रवाह्यम्

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