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महाभारत 13.17

अगम्यरूपा पृथिवी मांसशोणितकर्दमा
बभूव भरतश्रेष्ठ रुद्रस्याक्रीडनं यथा
भीरूणां त्रासजननी शूराणां हर्षवर्धनी

पूरा अध्याय