ग्रंथमहाभारतकर्णपर्वअध्याय 6868.13महाभारत 68.13एतद्वचो मद्रपतेर्निशम्य; स्वं चापनीतं मनसा निरीक्ष्य दुर्योधनो दीनमना विसंज्ञः; पुनः पुनर्न्यश्वसदार्तरूपःपिछलाअगलापूरा अध्याय