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महाभारत 66.64

यावच्चक्रमिदं भूमेरुद्धरामि धनंजय
न मां रथस्थो भूमिष्ठमसज्जं हन्तुमर्हसि
न वासुदेवात्त्वत्तो वा पाण्डवेय बिभेम्यहम्

पूरा अध्याय