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महाभारत 65.39

तान्पञ्चभल्लैस्त्वरितैः सुमुक्तै;स्त्रिधा त्रिधैकैकमथोच्चकर्त
धनंजयस्ते न्यपतन्पृथिव्यां; महाहयस्तक्षकपुत्रपक्षाः

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