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महाभारत 62.37

कुणिन्दपुत्रो दशभिर्महायसैः; कृपं ससूताश्वमपीडयद्भृशम्
ततः शरद्वत्सुतसायकैर्हतः; सहैव नागेन पपात भूतले

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