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महाभारत 60.12

विस्फार्य गाण्डीवमथोग्रघोषं; ज्यया समाहत्य तले भृशं च
बाणान्धकारं सहसैव कृत्वा; जघान नागाश्वरथान्नरांश्च

पूरा अध्याय