Utshovऐप डाउनलोड करें

महाभारत 57.33

कर्ण उवाच
प्रकृतिस्थो हि मे शल्य इदानीं संमतस्तथा
प्रतिभासि महाबाहो विभीश्चैव धनंजयात्

पूरा अध्याय