ग्रंथमहाभारतकर्णपर्वअध्याय 5555.65महाभारत 55.65सोऽतिविद्धो बलवता शत्रुणा शत्रुकर्शनः निपपात ततो भूमौ किंचित्प्राणो नराधिपपिछलाअगलापूरा अध्याय