ग्रंथमहाभारतकर्णपर्वअध्याय 5555.44महाभारत 55.44एवं दृष्ट्वा कृतं कर्म भीमसेनेन संयुगे दुर्योधनो महाराज शकुनिं वाक्यमब्रवीत्पिछलाअगलापूरा अध्याय