ग्रंथमहाभारतकर्णपर्वअध्याय 5555.40महाभारत 55.40संछिन्नभुजनागेन्द्रां बहुरत्नापहारिणीम् ऊरुग्राहां मज्जपङ्कां शीर्षोपलसमाकुलाम्पिछलाअगलापूरा अध्याय