Utshovऐप डाउनलोड करें

महाभारत 54.22

पश्य ध्वजांश्च द्रवतो विशोक; नागान्हयान्पत्तिसंघांश्च संख्ये
रथान्विशीर्णाञ्शरशक्तिताडिता;न्पश्यस्वैतान्रथिनश्चैव सूत

पूरा अध्याय