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महाभारत 54.11

अरीन्विशोकाभिनिरीक्ष्य सर्वतो; मनस्तु चिन्ता प्रदुनोति मे भृशम्
राजातुरो नागमद्यत्किरीटी; बहूनि दुःखान्यभिजातोऽस्मि सूत

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