Utshovऐप डाउनलोड करें

महाभारत 51.57

भ्रातरं मातुरासाद्य शल्यं मद्रजनाधिपम्
यदि त्वमरविन्दाक्ष दयावान्न जिघांससि

पूरा अध्याय