Utshovऐप डाउनलोड करें

महाभारत 51.4

भूत्वा हि कौरवाः पार्थ प्रभूतगजवाजिनः
त्वां वै शत्रुं समासाद्य विनष्टा रणमूर्धनि

पूरा अध्याय