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महाभारत 49.108

ब्रूयाद्य एवं गाण्डीवं देह्यन्यस्मै त्वमित्युत
स वध्योऽस्य पुमाँल्लोके त्वया चोक्तोऽयमीदृशम्

पूरा अध्याय