ग्रंथमहाभारतकर्णपर्वअध्याय 3535.52महाभारत 35.52बलौघस्तु समासाद्य बलौघं सहसा रणे उपासर्पत वेगेन जलौघ इव सागरम्पिछलाअगलापूरा अध्याय