ग्रंथमहाभारतकर्णपर्वअध्याय 3535.21महाभारत 35.21स संनिपातस्तुमुलो घोररूपो विशां पते आसीद्रौद्रो महाराज कर्णपाण्डवयोर्मृधेपिछलाअगलापूरा अध्याय