ग्रंथमहाभारतकर्णपर्वअध्याय 3434.12महाभारत 34.12पश्य कर्ण महाबाहुं क्रुद्धं पाण्डवनन्दनम् दीर्घकालार्जितं क्रोधं मोक्तुकामं त्वयि ध्रुवम्पिछलाअगलापूरा अध्याय