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महाभारत 26.45

स संस्मरन्द्रोणहवं महाहवे; ब्रवीमि सत्यं कुरवो निबोधत
न वो मदन्यः प्रसहेद्रणेऽर्जुनं; क्रमागतं मृत्युमिवोग्ररूपिणम्

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