ग्रंथमहाभारतकर्णपर्वअध्याय 2424.47महाभारत 24.47अमोघाय मृगाक्षाय प्रवरायुधयोधिने दुर्वारणाय शुक्राय ब्रह्मणे ब्रह्मचारिणेपिछलाअगलापूरा अध्याय