ग्रंथमहाभारतकर्णपर्वअध्याय 2323.34महाभारत 23.34याजनाध्यापनैर्विप्रा विशुद्धैश्च प्रतिग्रहैः लोकस्यानुग्रहार्थाय स्थापिता ब्रह्मणा भुविपिछलाअगलापूरा अध्याय