Utshovऐप डाउनलोड करें

महाभारत 17.94

मा योत्सीर्गुरुभिः सार्धं बलवद्भिश्च पाण्डव
सदृशैस्तात युध्यस्व व्रीडां मा कुरु पाण्डव
गृहं वा गच्छ माद्रेय यत्र वा कृष्णफल्गुनौ

पूरा अध्याय