ग्रंथमहाभारतकर्णपर्वअध्याय 1717.64महाभारत 17.64उरःस्थैरथ तैर्बाणैर्माद्रीपुत्रो व्यरोचत स्वरश्मिभिरिवादित्यो भुवने विसृजन्प्रभाम्पिछलाअगलापूरा अध्याय