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महाभारत 17.103

भिन्नकुम्भा विरुधिराश्छिन्नहस्ताश्च वारणाः
भिन्नगात्रवराश्चैव च्छिन्नवालाश्च मारिष
छिन्नाभ्राणीव संपेतुर्वध्यमाना महात्मना

पूरा अध्याय