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महाभारत 12.62

ततोऽर्जुनेषूनिषुभिर्निरस्य; द्रौणिः शरैरर्जुनवासुदेवौ
प्रच्छादयित्व दिवि चन्द्रसूर्यौ; ननाद सोऽम्भोद इवातपान्ते

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