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महाभारत 12.58

पद्मार्कपूर्णेन्दुसमाननानि; किरीटमालामुकुटोत्कटानि
भल्लार्धचन्द्रक्षुरहिंसितानि; प्रपेतुरुर्व्यां नृशिरांस्यजस्रम्

पूरा अध्याय