Utshovऐप डाउनलोड करें

महाभारत 85.95

परित्यज्य प्रियान्प्राणान्रणे विचर वीरवत्
न हि शैनेय दाशार्हा रणे रक्षन्ति जीवितम्

पूरा अध्याय